अमरोहाअमेठीअम्बेडकर नगरअलीगढ़आगराआजमगढ़इटावाउत्तरप्रदेशउन्नावएटाऔरैयाकन्नौजकानपुरकानपुर देहातकासगंजकुशीनगरकौशाम्बीखीरीगाजियाबादगाज़ीपुरगोंडागोरखपुरगौतम बुद्ध नगरचंदौलीचित्रकूटजालौनजौनपुरझाँसीदेवरियापीलीभीतप्रतापगढ़प्रयागराजफतेहपुरफर्रुखाबादफिरोजाबादफैजाबादबदायूंबरेलीबलरामपुरबलियाबस्तीबहराइचबागपतबांदाबाराबंकीबिजनौरबुलंदशहरमऊमथुरामहाराजगंजमहोबामिर्जापुरमुजफ्फरनगरमुरादाबादमेरठमैनपुरीरामपुररायबरेलीलखनऊललितपुरवाराणसीशामलीशाहजहाँपुरश्रावस्तीसंत कबीर नगरसंत रविदास नगरसम्भल (भीम नगर)सहारनपुरसिद्धार्थ नगरसीतापुरसुल्तानपुरसोनभद्रहमीरपुरहरदोईहाथरस (महामाया नगर)हापुड़

अबला चंडी बन गरजी तो ये दुनिया थर्राएगी……

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर गजरौला की कवियत्री रूचि मित्तल की वॉल से

बहुत सह चुकी अब न सहेगी
अब खुलकर प्रतिकार करेगी
नारी पर गर ज़ुल्म हुआ तो
कंगन को तलवार करेगी

चुप रह कर सह जाना भी तो
कायरता कहलाता है
भीतर का ग़म बढ़ते बढ़ते
शोलो में ढल जाता है

न समझो कि अबला है ये
चुप रह सब सह जाएगी
अबला चंडी बन गरजी तो
ये दुनिया थर्राएगी

कभी भवानी कभी ये दुर्गा
कभी मनु कभी जोधा है
हर मुश्किल से भिड़ने वाली
ये रज़िया सी योद्धा है

नारी की ही गोद मे पलकर
मर्यादित श्री राम हुए
नारी के आंचल में छिपकर
गौरान्वित घनश्याम हुए

नारी का अपमान हुआ जब
कुरुक्षेत्र परिणाम हुआ
सीता का जब हरण हुआ तब
सोचो क्या अंजाम हुआ

नारी नही है भोग की वस्तु
न इसका अपमान करो
नारी ही नर की शक्ति है
नारी का सम्मान करो।

©रुचि मित्तल
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (कथाकुंज)

Khabardar 24

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!