अमरोहा के उत्पादों की अमेरिका-यूरोप तक गूंज, टर्नओवर 60 करोड़ के पार
ओडीओपी ने गढ़े सफलता के नए आयाम: 14 हजार को मिला रोजगार, ई-कॉमर्स पर छाए उद्यमी

नवनीत अग्रवाल
अमरोहा। उत्तर प्रदेश सरकार की ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ओडीओपी) योजना अमरोहा के उद्यमियों और कारीगरों के लिए एक बड़ी सौगात साबित हुई है। इस योजना की बदौलत पिछले पांच वर्षों में जिले के ढोलक, रेडीमेड गारमेंट्स और मेटल व वुडन हैंडीक्राफ्ट उद्योग ने उत्पादन और निर्यात में अभूतपूर्व छलांग लगाई है। योजना से जुड़कर जिले में 4122 प्रत्यक्ष और 10,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं, जिसने युवाओं का पलायन रोका है और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त किया है। ‘स्टोनमैन क्राफ्ट’ और ‘राम म्यूजिकल’ जैसे उद्यमों का सालाना टर्नओवर 10 से 60 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, और उनके उत्पाद सात समंदर पार अपनी मजबूत पहचान बना चुके हैं।

2147 इकाइयों को दिया जा चुका योजना का सीधा लाभ
जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक अनूप श्रीवास्तव के अनुसार अब तक 2147 इकाइयों को योजना का सीधा लाभ दिया जा चुका है। योजना के अंतर्गत महिला और युवा उद्यमियों की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। अब इस शानदार वैश्विक सफलता के बीच उद्यमियों का मानना है कि यदि शासन स्तर से इंडस्ट्रियल एरिया, सुलभ बैंक ऋण और विदेशी वेयरहाउस जैसी बुनियादी जरूरतों को और सुदृढ़ कर दिया जाए, तो अमरोहा का यह उद्योग देश की अर्थव्यवस्था में और भी बड़ा योगदान दे सकेगा।

सात समंदर पार अमरोहा की धाक और निफ्ट के डिजाइनर
अमरोहा की ‘स्टोनमैन क्राफ्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ में तैयार होने वाले मेटल और वुडन हैंडीक्राफ्ट उत्पादों की विदेशों में भारी मांग है। 100 प्रतिशत निर्यात वाली इस कंपनी ने 50 से 60 करोड़ रुपये का सालाना टर्नओवर हासिल कर एक शानदार मिसाल पेश की है। पिछले 12 सालों से इस काम से जुड़े व कंपनी के प्रबंधक पंकज बिश्नोई ने बताया कि 95 फीसदी माल सीधे अमेरिका और शेष 5 फीसदी यूरोप को निर्यात किया जा रहा है। सबसे अहम बात यह है कि फैक्ट्री में वर्तमान में 1000 कर्मचारी काम कर रहे हैं, जिनमें से 80 फीसदी कामगार सिर्फ अमरोहा जिले के ही हैं, जबकि बाकी मुरादाबाद और आसपास के क्षेत्रों से आते हैं। सरकार द्वारा न्यूनतम वेतन में की गई वृद्धि और कंपनी द्वारा सालाना 5 से 10 प्रतिशत का इंक्रीमेंट दिए जाने से स्थानीय कारीगरों का जीवन स्तर सुधरा है। विदेशी ग्राहकों की उच्च मांग और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे रहने के लिए कंपनी ने ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी’ (NIFT) के डिजाइनर्स को काम पर रखा है। ये पेशेवर डिजाइनर उत्पादों को नया और आकर्षक रूप देते हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय मेलों और बाजारों में इनके उत्पादों की अच्छी मांग रहती है।

व्यापार में 10 से 15 प्रतिशत का सीधा उछाल
जीआई (GI) टैग और ओडीओपी के बेहतरीन तालमेल ने अमरोहा के पुश्तैनी वाद्य यंत्र और गारमेंट उद्योग को नई ऊंचाइयां दी हैं। प्रबंधक राजीव कुमार के अनुसार, चौथी पीढ़ी द्वारा संचालित ‘राम म्यूजिकल हैंडीक्राफ्ट’ और उनकी अन्य दो कंपनियों (गणपति और अमरोहा एंटरप्राइजेज) का सालाना टर्नओवर 8 से 10 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी ई-कॉमर्स साइट्स पर ये कंपनियां अपनी श्रेणी में भारत की टॉप सेलर बनकर उभरी हैं। ढोलक, तबला, पखावज, डमरू और इकतारा जैसे स्वदेशी वाद्य यंत्र अमेरिका, कनाडा, खाड़ी देशों, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर सहित कई देशों में निर्यात किए जा रहे हैं। ढोलक को जीआई टैग मिलने के बाद से इस व्यापार में 10 से 15 प्रतिशत का सीधा उछाल आया है। पूरे भारत में ढोलक का ढांचा (शैल) केवल अमरोहा में ही बनता है और यहीं से पूरे देश में सप्लाई होता है।

पलायन पर लगी रोक, महिलाओं के हाथों में आई कमान
मुरादाबाद में पिछले 30 वर्षों से हैंडीक्राफ्ट का काम कर रहे ‘तीर्थंकर टेक्सटाइल्स’ के मालिक शमीश जैन ने ओडीओपी योजना से जुड़कर अमरोहा में अपनी नई अपैरल (कपड़ा) यूनिट शुरू की है। इस नई यूनिट में 25 फैब्रिक मशीनें और 500 सिलाई मशीनें लगाई गई हैं, जहां टी-शर्ट, जॉगर्स, विंटर वियर और इनर वियर तैयार किए जा रहे हैं। योजना के तहत मिली मदद से कंपनी के पास वर्किंग कैपिटल की समस्या दूर हुई है और उनका कारोबार करीब 20 प्रतिशत तक बढ़ गया है। पहले जहां कंपनी में 100-200 कर्मचारी काम करते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 400 के करीब पहुंच गई है। इस यूनिट में 30 फीसदी महिलाएं काम कर रही हैं, जिसे भविष्य में 70 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य है। इस बड़ी टेक्सटाइल यूनिट के खुलने से स्थानीय स्तर पर रोजगार का बड़ा संकट दूर हुआ है। जो कुशल कारीगर पहले काम की तलाश में नोएडा, गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे शहरों की ओर पलायन करते थे, उन्हें अब अपने घर के पास ही रोजगार मिल रहा है।

रफ्तार पकड़ते उद्योग की नई उम्मीदें और भविष्य की राह
ओडीओपी योजना से अमरोहा का व्यापार जिस तेज गति से बढ़ रहा है, उसे देखते हुए उद्यमियों के सामने अब उत्पादन क्षमता और निर्यात बढ़ाने की सुखद चुनौती है। करोड़ों रुपये का कारोबार कर रहे वाद्य यंत्र और हैंडीक्राफ्ट उद्योग अभी घरों और तंग गलियों से संचालित हो रहे हैं। वैश्विक मांग को पूरी करने के लिए उद्यमी अब सरकार से एक सर्वसुविधायुक्त इंडस्ट्रियल एरिया की आवश्यकता महसूस कर रहे हैं, ताकि लोडिंग-अनलोडिंग जैसी लॉजिस्टिक समस्याएं दूर हो सकें। इसके अलावा, उद्यमियों का सुझाव है कि ओडीओपी के तहत बैंक ऋण की प्रक्रिया को कागजी औपचारिकताओं से निकालकर और अधिक सरल व सुलभ बनाया जाए, ताकि कोई भी होनहार कारीगर पूंजी के अभाव में पीछे न रहे। निर्यातकों को रिटर्न माल के भारी नुकसान से बचाने के लिए विदेशों में भारतीय वेयरहाउस की स्थापना की मांग भी उठ रही है। इन चुनौतियों को समझते हुए प्रशासन भी सकारात्मक है और आने वाले एक से दो वर्षों में रोजगार सृजन और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए जनपद में कॉमन फैसिलिटेशन सेंटर बनाया जाना प्रस्तावित है तथा एक प्लेज पार्क के निर्माण की प्रक्रिया भी चल रही है।

पारदर्शी मॉनिटरिंग व्यवस्था
योजना को पारदर्शी और सुचारू रूप से लागू करने के लिए जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स के निर्देशन में हर महीने उद्योग बंधु की बैठक का आयोजन किया जाता है। इसके साथ ही मुख्य विकास अधिकारी द्वारा टूल किट और प्रशिक्षण कार्यों का नियमित निरीक्षण किया जाता है। वहीं, प्रशिक्षण के लिए लाभार्थियों का चयन शासनादेश के अनुसार निर्धारित जिला स्तरीय समिति द्वारा पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाता है।



