प्रीति चौधरी “प्रीत” का प्रथम गजल संग्रह-“हमने की है प्रीति ग़ज़ल से” प्रकाशित

नवनीत अग्रवाल
अमरोहा। शिक्षिका एवं कवियत्री प्रीति चौधरी का प्रथम गजल संग्रह-“हमने की है प्रीति ग़ज़ल” प्रकाशित हो चुका है। जिसमे विविध विषयों पर 80 गजलें हैं। यह एमेजोन पर उपलब्ध है। आप इसे वहां से आर्डर कर आसानी से मंगवा सकते हैं।
प्रीति चौधरी के मन की बात…..
कहते हैं खुशी बाँटने से बढ़ती है इसलिये रख रही हूँ आपके सामने – अयन प्रकाशन, दिल्ली द्वारा प्रकाशित होकर आज ही प्राप्त हुआ अपना ये प्रथम ग़ज़ल-संकलन। प्रथम धन्यवाद ईश्वर को देते हुए, मैं समर्पित करती हूँ अपने इस ग़ज़ल-संकलन को अपने स्मृति-शेष पिताश्री देवेन्द्र पाल सिंह जी को, तथा ह्रदय से आभार व्यक्त करती हूँ आदरणीय दादा उदय प्रताप सिंह जी, दीदी डाक्टर शशि तिवारी जी का, मुझे काव्य जगत में पहचान दिलाने व मेरे स्वप्न को मूर्त रूप देने के लिये आदरणीय और आत्मीय प्रशान्त उपाध्याय जी का, अयन प्रकाशन, दिल्ली तथा मेरे अपने उन सभी शुभ चिन्तकों का जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रुप से मेरे मनोबल को बढ़ाते हैं।— प्रीति चौधरी
आइए आप भी जानिए, अमरोहा की कवियत्री प्रीति चौधरी के बारे में—-
नाम – प्रीति चौधरी “प्रीत”
पिता का नाम – श्री देवेन्द्र पाल सिंह
माता का नाम – श्रीमती शशि कान्ता
पति का नाम – श्री पंकज चौधरी
जन्म – सिम्भावली (गाजियाबाद)
शिक्षा – एम एस सी (गणित), एम एड
लेखन विधा – नई कविता, क्षणिका, गीत, ग़ज़ल, मुक्तक, दोहा, हाइकू, बाल कविता।
प्रकाशन – महक गया ये मेरा जीवन (नई कविता-संकलन), हमने की है प्रीति ग़ज़ल से (ग़ज़ल-संकलन) प्रकाशित। एक मुक्तक-संकलन शीघ्र प्रकाश्य।साहित्य अमृत, दि अण्डरलाइन, हिन्दी की गूँज, नव किरण सहित देश की विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में अब तक विभिन्न विधाओं की अनेक रचनाएँ प्रकाशित।
प्रसारण – आकाशवाणी रामपुर केन्द्र से समय-समय पर काव्य-पाठ।
अन्य गतिविधियाँ – कवि सम्मेलन मंच पर सक्रिय भूमिका, विभिन्न स्तरों के कार्यक्रमों का संचालन।शिक्षक दिवस पर विशिष्ट शिक्षक के रूप में व मतदाता जागरूकता अभियान में उल्लेखनीय भूमिका हेतु जिलाधिकारी द्वारा सम्मानित।विभागीय स्तर पर आयोजित विभिन्न सेमिनारों में जनपद का प्रतिनिधित्व।
सम्प्रति – राजकीय कन्या इण्टर कॉलेज, हसनपुर (अमरोहा) में शिक्षण सेवा में।
निवास – गजरौला – अमरोहा (उ. प्र.) पिन – 244235
सम्पर्क – 95288 94153
ईमेल – cpreeti37@gmail.com
अयन प्रकाशन, दिल्ली से प्रकाशित हो रहे मेरे ग़ज़ल-संकलन “हमने की है प्रीति ग़ज़ल” की भूमिका के रूप में श्रेष्ठ वरिष्ठ कवि, ग़ज़लकार श्री प्रशांत उपाध्याय जी की समीक्षात्मक अभिव्यक्ति —
अमराई-सी शीतलता और गंगा की जलधार-सी पावनता का सुख देती हैं – “हमने की है प्रीति ग़ज़ल से” की ग़ज़लें प्रशान्त उपाध्याय
भले ही ग़ज़ल, उर्दू साहित्य की मुख्य व प्राचीन विधा हो मगर आज ग़ज़ल हिन्दी साहित्य में उतनी ही लोकप्रिय है जितनी कि उर्दू में। निश्चित ही दुष्यन्त कुमार ने ग़ज़ल को एक परम्परावादी घेरे से बाहर निकाल, जनचेतना के द्वार तक पहुँचाकर साहित्य के क्षेत्र में एक नई क्रान्ति का सूत्रपात किया, जिसे बलवीर सिंह रंग, अदम गोंडवी, उदयप्रताप सिंह, डॉ. कुँवर बेचैन, शिव ओम अम्बर एवं जमुना प्रसाद उपाध्याय जैसे ग़ज़लकारों ने अपना वैचारिक व सर्जनात्मक समर्थन देकर हिन्दी साहित्य की धरा पर पुष्पित, पल्लवित किया। आज हिन्दी ग़ज़ल ने अपने नये कलेवर में नव प्रयोगों के रंग और अपनी मौलिक गंध समेटकर साहित्य जगत में अपना एक विशेष श्रोता व पाठक वर्ग तैयार करने में सफलता प्राप्त की है।
यहाँ मैं युवा कवयित्री प्रीति चौधरी “प्रीत” के ग़ज़ल-संकलन “हमने की है प्रीति ग़ज़ल से” पर चर्चा कर रहा हूँ। प्रीति चौधरी का साहित्यिक क्षेत्र में सक्रियता के साथ पदार्पण कोरोना काल से हुआ है। विशेष रूप से ग़ज़ल उनके मन की विधा है। गत एक वर्ष से वे मेरे साहित्यिक सानिध्य में हैं, मैं विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि अल्प समय में ही उनकी क़लम ने हिन्दी ग़ज़ल पर अपनी पकड़ मज़बूत करना शुरू कर दिया है।
दृष्टिपात करने पर उनकी ग़ज़लों में कथ्य व विषय की विविधता नज़र आती है। उनके ग़ज़ल-संसार में बोलचाल की मिश्रित भाषा की सरलता, नये विषयों की खोज की चेष्टा व नये प्रयोग करने की ललक दिखाई देती है। उनकी ग़ज़लें मुख्यतः मानवीय मूल्यों की स्थापना, प्यार की कोमल अनुभूतियों, वर्तमान परिवेश की विडम्बनाओं, ज़िन्दगी की समस्याओं, आत्मीय संवेदनाओं व आज के युग की अंधी भौतिक दौड़ के प्रति चिन्ता वाले अभिव्यक्ति के स्वरों को अपने आप में सहेजे हैं।
किसी भी रचनाकार के व्यक्तित्व की छाप उसकी रचनाओं में स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर होती है, कहीं न कहीं किसी न किसी रूप में ये रचनाएँ रचनाकार के स्वभाव, चरित्र व जीवन-शैली का परिचय देती हैं। जैसा अक्खड़पन, स्वच्छंद जीवन जीने की ललक व लोभ-लालच से निरपेक्ष भाव उनके व्यक्तित्व का है, उन्होंने वैसे शेर भी कहे हैं —
चलने की आज़ादी जिन पर होती है रस्ते ऐसे मुझको बेहतर लगते हैं
जाकर और किसी को देनाले जा तू अपनी ख़ैरातें
शिखर छूना हमारा तो हुनर हैनहीं लगता तुम्हें इसकी ख़बर है
प्यार-मुहब्बत से ग़ज़ल विधा का जन्मजात का साथ है और ये मानवीय मन व मानव जीवन के अनिवार्य अंग भी हैं। चूँकि प्रत्येक रचनाकार अपनी रचनाओं में अपनी विभिन्न मनोदशाओं को अभिव्यक्ति देता है, अतः किसी भी रचना में ये रंग सहज रूप से आ जाते हैं, प्रीति चौधरी भी इस सबसे अलग नहीं हैं। चूँकि वे मूलतः शृंगार लिखती हैं तो उनकी अधिकांश ग़ज़लों में प्रेम के विभिन्न आयाम, विभिन्न रंग, विभिन्न स्वरूप व विभिन्न मनोदशाओं के सहज भाव दिखायी देते हैं —
एक अहसास इनमें छुपा आज भी
प्यार की चिट्ठियाँ बाँधकर मत रखो
भावना इक-दूसरे की जो समझ में आ गयी मन हमारा-आपका भी आइना हो जाएगा
कहीं पर भूमिका जैसे कहीं लगते कथानक-से
अधूरी-सी कहानी का प्रमुख किरदार हो प्रियतम
भूले दुनिया भूले ख़ुद को भूले सब कुछ देख तुम्हें
गिनती कर लो मेरी भी तुम अपने सँग-सँग पागल में
प्रत्येक रचनाकार सदियों से अपने युग का गायक रहा है। आधुनिक युग की जीवन-शैली के साथ-साथ वर्तमान परिवेश की ज़िन्दगी की जटिलताओं, त्रासदी, मानवीय सम्बन्धों के दोहरेपन व सामाजिक विसंगतियों के स्वर प्रीति चौधरी की ग़ज़लों में प्रचुर मात्रा में पूरी चमक-धमक के साथ उपस्थित हैं —
थकी बैठी हुई हैं कामनाएँ
कँटीली भावनाओं की डगर है
रिश्ते आज कबड्डी-से
खींचे हैं सबने पाले
बेटी-बेटी कहकर रखते
तेज़ निगाहें उलझी-उलझी
षड्यंत्रों की बू आती है
हैं मुस्कानें उलझी-उलझी
व्यक्ति अपने परिवेश में चाहे कितनी नकारात्मक स्थितियों को जीता हो मगर एक सकारात्मकता ही आदमी की ज़िन्दगी को सार्थकता प्रदानकर ख़ुशनुमां बनाती है। प्रीति चौधरी की ग़ज़लें थके-हारे निराश आदमी को हौसला देकर उसकी साँसों को एक नई चमक देती हैं —
जो कभी हौसला नहीं करता
आसमाँ वो छुआ नहीं करता
बाज़ुओं पे जिसे भरोसा हो
आँधियों से डरा नहीं करता
हौसलों के उछालकर पत्थर
बादलों में निशान कर लेंगे
मिला है ज़िन्दगी को हौसलों का आज गोवर्धन
हृदय में गूँजती वंशी मचलता आस का ग्वाला
चूँकि प्रीति जी एक राजकीय बालिका विद्यालय में गणित की शिक्षिका हैं अतः वे अपने विषय को पूरे तेवर के साथ अपनी अभिव्यक्तियों में भी पिरोने में सफल रही हैं —
खींचते ख़ुशबुओं के सदा वृत्त हम
द्वेष के कोण हमने बनाये नहीं
तुम पढ़ाते रहे ज़िन्दगी का गणित
प्रीति के प्रश्न तो हल कराये नहीं
इन दिनों नयी कविता व नवगीत के तेवर से प्रभावित होकर कुछ ग़ज़लकार अपनी ग़ज़लों में भी नये प्रतीकों व नये बिम्बों को गढ़ रहे हैं। यत्र-तत्र यह प्रयास प्रीति चौधरी ने भी अपनी ग़ज़लों में किया है और वे उसमें पूर्णतः सफल भी रही हैं —
उम्मीदों के लव-कुश लेकर जंगल में
ख़ुशियों की सीता बेचारी रहती है
कोई पहना देता पाँवों में बिछुए
और किसी की प्रीति कुँवारी रहती है
संसार का प्रत्येक व्यक्ति अपनी उम्र से अर्जित असंख्य अनुभवों को अपनी झोली में समेटे हुए होता है, जिसमें कुछ दर्द के पर्याय भी होते हैं और कुछ गहरे रहस्य भी। जीवन के उन्हीं अनुभवों को जब बारीक अभिव्यक्ति मिलती है तो रचनाकार की क़लम कुछ कालजयी शेर उगलती है —
काम न तेरे आयेगा कुछ
जीवन में पाया जो छल से
कर देंगे अन्तरमन पावन
आँसू खारे गंगाजल-से
बस पहन सकते मुखौटा हम जहाँ के सामने
किन्तु ख़ुद से तो कभी कुछ भी छुपा होता नहीं
छल रहा है दोस्ती में हर किसी को रोज़ ही
आत्मा से भी कभी क्या तू डरा होता नहीं
कुल मिलाकर प्रीति चौधरी “प्रीत” जी के प्रस्तुत ग़ज़ल-संकलन “हमने की है प्रीति ग़ज़ल से” की ग़ज़लें जहाँ एक ओर इश्क-मुहब्बत की ख़ुशबू में सराबोर हैं वहीं दूसरी ओर वर्तमान समय का आइना भी हैं। ये विसंगतियों से क़दम ताल करते हुए आदमी का मुकम्मल बयान भी हैं और जो सहज-सरल व्यक्तित्व प्रीति चौधरी जी का है, वही सहज-सरल भाव-बोध अपने अन्दर समेटे हुए हैं। ये तमाम ग़ज़लें व्यक्ति की सामाजिक चेतना को जागृत कर उसको दायित्व बोध कराती हैं, सभ्यता, संस्कृति और संस्कारों का मूल्य समझाती हैं और आदमी को सुकून की ज़िन्दगी जीने का मार्ग इंगित करती हैं। ये ग़ज़लें भटकते हुए जीवन मूल्यों को पुनर्स्थापित करने हेतु प्रतिबद्ध दिखायी देती हैं। ये विषयों के विविध रंग अपने अन्दर समेटे हैं साथ ही अभिव्यक्ति के सटीक व सार्थक स्वरों को झंकृत करती हैं। वर्तमान समय की अंधी भौतिक दौड़ में कहीं पीछे छूटती मानवीय संवेदनाओं और निरन्तर यंत्रवत होती जा रही भावनाओं को अमराई-सी शीतलता और गंगा की जलधार-सी पावनता का सुख देती हैं।
ग़ज़ल-संकलन “हमने की है प्रीति ग़ज़ल से” की सफलता व प्रीति चौधरी “प्रीत” के स्वर्णिम भविष्य की आत्मिक कामनाओं सहित —
प्रशान्त उपाध्याय364, शम्भू नगरशिकोहाबाद – 2831356398197138 – 9897335385Upadhyay.prashant2010@gmail.com









