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नूतन वर्ष-2024 पर वेंक्टेश्वरा में ‘‘काव्य संध्या ‘‘काव्याँजली‘‘ का आयोजन

– प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस वर्ष में भारत विश्व में सफलता के नये कीर्तिमान गढ़ेगा – डॉ. सुधीर गिरि, चेयरमैन, वेंक्टेश्वरा समूह

–  गुरूकुल के आचार्यों एवं पुरोहितों ने संस्थान प्रबंधन एवं शिक्षकों के साथ मिलकर महायज्ञ/ हवन करके विश्व शान्ति, सद्भाव एवं भारत को विश्व गुरू बनाने के लिये दी आहुतियां

– कवियत्री डॉ. शुभम त्यागी, डॉ. श्री गोपाल ‘‘नारसन‘‘, डॉ. योगेन्द्र शर्मा ‘‘अरूण‘‘ अनुराग मिश्र ‘‘गैर‘‘ समेत कई कवियों ने प्रस्तुतियां देकर नये साल के समारोह को बनाया यादगार

– कवियत्री डॉ. शुभम त्यागी को ‘‘नारी शक्ति सम्मान‘‘ के साथ उपस्थित कवियों को शॉल एवं पटका एवं पगड़ी पहनाकर किया सम्मानित

नवनीत अग्रवाल 

अमरोहा।  श्री वेंक्टेश्वरा विश्वविद्यालय/ संस्थान में नववर्ष 2024 का प्रथम दिवस बेहद खास रहा। भारतवर्ष को विश्व गुरू बनाने एवं विश्व शान्ति व कल्याण के लिए महायश्र व हवन का आयोजन किया गया। इसके साथ ही सांस्कृतिक संध्या ‘‘काव्याँजली‘‘ का भी बहुत शानदार आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित आधा दर्जन कवियों ने अपनी शानदार देशभक्ति श्रृंगार/ प्रेम हास्य रचनाओं से माहौल को शानदार बना दिया।

– श्री वेंक्टेश्वरा विश्वविद्यालय के ‘‘महार्षि व्यास यज्ञ स्थली‘‘ पर सबसे पहले गुरूकुल के ग्यारह आचार्यों एवं पुरोहितों ने नववर्ष के उपलक्ष्य में महायज्ञ एवं हवन का आयोजन किया जिसमें संस्थान प्रबंधन एवं शिक्षकों ने विश्व शान्ति एवं कल्याण के लिए आहुतियाँ दी। वहीं दूसरी ओर काव्य संध्या ‘‘काव्याँजली‘‘ का शुभारम्भ समूह चेयरमैन डॉ. सुधीर गिरि, प्रतिकुलाधिपति डॉ. राजीव त्यागी विख्यात कवियत्री डॉ. शुभम त्यागी, कवि डॉ. योगेन्द्र नाथ शर्मा, ‘‘अरु​ण‘‘, डॉ. अनुराग मिश्र ‘‘गैर‘‘ आदि ने सरस्वती जी की प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्जवलित करके किया।

– ‘‘काव्याँजली‘‘ में सबसे पहले पढ़ते हुए डॉ. शुभम त्यागी ने शुभारम्भ करते हुए कहा कि ……

मिलकर जुलकर सब बैठे हैं उत्सव बड़ा मना देंगे।

तुम क्या जानो हम अधरों पर मन के भाव सजा देंगे।।

साथ तुम्हारा जो मिल जाए, आह, वाह और ताली से।

कविता की तो बात ही क्या है, दिल का हाल सुना देंगे।।

– कवि डॉ. योगेन्द्रनाथ ‘‘अरूण‘‘ ने कहा कि ……

अभी सूरज नहीं डूबा, जरा सी शाम होने दो।

मैं वापस लौट आऊँगा, मुझे नाकाम होने दो।

मुझे बदनाम करने के बहाने ढूँढ़ते हैं लोग

मैं खुद हो जाऊँगा बदनाम, मेरा नाम तो होने दो।

कवि दिनेश रघुवंशी ने कहा कि …..

गनीमत है बचाकर, मैं जो अपना सर चला आया।

मगर सच ये भी है, कि साथ मेें एक डर चला आया।।

बड़ी लम्बी कतारें थी, वहाँ बस झूठ बिकता था।

मैं अपना सच लिए, चुपचाप अपने घर चला आया।।

 इस अवसर पर समूह सलाहकार आर.एस. शर्मा, कुलपति डॉ. राकेश कुमार यादव, कुलसचिव डॉ. पीयूष पाण्डे, डॉ. दिव्या गिरधर, सी.ई.ओ. डॉ. मोहित शर्मा, डॉ, तेजपाल सिंह, डॉ. अनिल जयसवाल, डॉ. आशुतोष सिंह, डॉ. ओम प्रकाश गोसाई, डॉ. राहुल कुमार, अश्विन कुमार सक्सेना, डॉ. राजवर्धन, डॉ. सर्वनन्द साहू, मनीष कुमार शर्मा, अरूण कुमार गोस्वामी, मारूफ चौधरी, मेरठ परिसर से निदेशक डॉ. प्रताप सिंह मीडिया प्रभारी विश्वास राणा आदि लोग उपस्थित रहे।

Khabardar 24

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