बचपन में खुली आंखों से देखा था राम मंदिर का सपना, अब हो रहा है साकार

गजरौला में स्थित जुबिलेंट इंग्रेविया लिमिटेड में चिकित्सक डा.प्रमोद अग्रवाल की पत्नी कवियत्री, साहित्यकार एवं कथा कुंज साहित्य सेवा परिषद में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (महिला विंग) रूचि मित्तल की स्मृति…..
नवनीत अग्रवाल
अमरोहा। बचपन की आपबीती कुछ भावनाएं हावी हो रही थीं और हो भी क्यों न, अवसर ही ऐसा है भगवान श्री राम प्राण प्रतिष्ठा का । राम अपने आप में सिर्फ एक नाम नहीं,बल्कि आस्था है, करोड़ो देशवासियों की । जैसे जैसे प्राण प्रतिष्ठा का दिन नजदीक आ रहा है..वही जोश, खुशी व भावनाएं दिल में हिलोरें मार रही हैं जो उस समय थीं,जब मैं छोटी थी| लेकिन भावनाएँ कहाँ उम्र देखती हैं। यह कहना है गजरौला में स्थित जुबिलेंट इंग्रेविया लिमिटेड में चिकित्सक डा.प्रमोद अग्रवाल की पत्नी कवियत्री, साहित्यकार एवं कथा कुंज साहित्य सेवा परिषद में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (महिला विंग) रूचि मित्तल का। 22 जनवरी को अयोध्या में बने भव्य श्री राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा होनी है। रूचि मित्तल इसे लेकर काफी उत्साहित हैं। उन्हें अपना बचपन भी याद आ गया। मूल रूप से हापुड़ निवासी रूचि मित्तल ने बताया कि उनकी मां विनीता मित्तल एवं पिता चंद्रभूषण मित्तल का दिवंगत प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से खासा जुड़ाव था। वह कई बार उनके घर भी आए और मम्मी-पापा उनके कार्यक्रमों में भी जाते थे। अतीत के सागर में डूबीं रूचि मित्तल बताती हैंः वाक्या सन् 1992 का । हर तरफ, हर जुबान पर, हर दिल में बस एक ही नाम था राम का । एक ही नारा था जय श्री राम का|। मेरी माँ विनीता मित्तल भी प्रत्यक्ष रूप से इस आंदोलन से जुड़ी थीं। याद करते ही ऐसा लगता कि जैसे कल की ही बात हो | माँ को गिरफ्तार कर अस्थाई जेल ले जाया गया था। मन में डर व जोश का मिलाजुला भाव था। देर रात तक सब को रिहा कर दिया गया था ।जैसे ही कार सेवकों की बस आकर रुकी,पूरा मोहल्ला माला लेकर सम्मान में खड़ा था। सब एक-दूसरे से गले लग रहे थे। सबकी आँखों से खुशी के अश्रु बह रहे थे कि एक पड़ाव को पार कर ही लिया। बहुत गर्व हुआ था उस दिन अपनी माँ पर |पुलिस का चप्पे-चप्पे पर पहरा था |अनहोनी के अंदेशे से रात में सब जागते थे । हमारे घर की बड़ी सी छत पर ही सब रात में इकट्ठे होते थे,चाय का दौर चलता था। सोचा नहीं था कि जो सपना तब देखा था वह इतनी भव्यता से पूरा होगा,और हमारे पास अपने बच्चों को परियों की कहानियाँ नहीं,बल्कि एक हकीकत होगी सुनाने को। जिसे सुनाते हुए दिल को सुकून मिलेगा, क्योंकि वह नाम ही सुकून देता है। वह ही एक नाम जो जन्म से लेकर मृत्यु तक साथ रहता है। रूचि मित्तल कहती हैं कि अयोध्या में भव्य श्री राम मंदिर के दर्शन को न जाने कब जाना होगा लेकिन उनके लिए यही सबसे बड़ा सौभाग्य है कि गजरौला में भी भव्य श्री राम मंदिर है और वह अक्सर यहां पूजा करने आया करती हैं।






