’’खामोश हम रहे तो, पहल कौन करेगा! उजड़े चमन में फेरबदल कौन करेगा!
वेंक्टेश्वरा विश्वविद्यालय में ’’हिन्दी पत्रकारिता दिवस’’ पर काव्य संगोष्ठी एवं ’’साहित्य सम्मान समारोह’’ का आयोजन


– लोकतन्त्र के चौथे स्तंभ ’’मीडिया’’ की निष्पक्ष, निर्भीक एवं लोकहित की खबरों से आज भी ’पत्रकारो’ का सम्मान शिखर पर- श्री सुधीर गिरि, संस्थापक अध्यश वेंक्टेश्वरा समूह
– बढ़ते आर्थिक/सामाजिक दबावों एवं टीआरपी की गलाकाट प्रतिस्पर्धा के बावजूद देश में आज भी हजारों ’’मिशनरीज पत्रकारिता’’ करने वाले ’’सम्मानित मीडिया बन्धुओं’’ की वजह से देश में अंतिम पायदान पर खडे शोषित, वंचित आदमी की आवाज उठाने से न्याय की आस बंधी रहती है- डा. राजीव त्यागी, प्रतिकुलाधिपति, श्री वेंक्टेश्वरा विश्वविद्यालय
नवनीत अग्रवाल
अमरोहा। राष्ट्रीय राजमार्ग बाईपास स्थित श्री वेंक्टेश्वरा विश्वविद्यालय/संस्थान में ’’हिन्दी पत्रकारिता दिवस’’ पर साहित्यिक संस्था ’’मधुरम’’ के संयुक्त तत्वावधान में ’’भव्य काव्य संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों से पधारे दो दर्जन से अधिक कवियों/कवियत्रियों, शायरों ने देश में लोकतंत्र के चौथे स्तंभ ’’मीडिया’’ के सम्मान में एक से बढ़कर एक रचना पेश करते हुए ’’मीडिया’’ को सरकार एवं आमजनमानस के बीच का ’’सेतु’’ करार दिया। संस्थान प्रबन्धन की ओर से देश के विभिन्न हिस्सों से पधारे कवियो एवं साहित्यकारों को शॉल, स्मृति चिन्ह, तुलसी माला, पटका एवं पगड़ी भेट कर सम्मानित किया गया।
शुक्रवार को श्री वेंक्टेश्वरा विश्वविद्यालय/संस्थान के टैगोर सभागार में हिंदी पत्रकारिता दिवस पर आयोजित ’’काव्यसंगोष्ठी एवं सम्मान समारोह’’ का शुभारंभ संस्थापक अध्यश डा. सुधीर गिरि, प्रतिकुलाधिपति डा. राजीव त्यागी, मधुरम की अध्यक्ष एवं कवियत्री डा. मधु चतुर्वेदी, डा. चेतन आनंद, रेडियो आरजे डा. नीरजा चतुर्वेदी, कुलपति प्रो. कृष्णकान्त दवे आदि ने सरस्वती मां की प्रतिमा के सन्मुख दीप प्रज्जवलित करके किया।
गाजियाबाद से पधारे विख्यात शायर गोविन्द गुलशन ने कहा-
’’यकीन कीजिए किस पर, यकीन में क्या है!
मुझे पता है मेरी, आस्तीन में क्या है!!’’
प्रख्यात कवियत्री डा. मधु चतुर्वेदी ने कहा-
’’न दुनिया को जीत पाये जो, सिकन्दर हो नहीं सकता!
बिना अभ्यास के कोई धुरन्धर हो नहीं सकता!
जरा सी बाढ़ आते ही, लगे जो तोड़ने सीमा!
को कोई ताल है उथला, समन्दर हो नहीं सकता!!’’ पढ़कर खूब वाहवाही लूटी।
हापुड़ से पधारे कवि डा. अनिल बाजयेयी ने पढ़ा-
’’सितारा एक टूटे तो, गगन खाली नहीं होता!
झड़े गर फूल कोई तो, चमन खाली नहीं होता!
हमारी माँ के दामन में है, लाखो लाल राणा से!
सपूतों से कभी मेरा, वतन खाली नहीं होता!!
सुनाकर देशभक्ति की ज्वाला भर दी।
पिलखुवा से पधारे कवि डा. सतीश वर्द्धन ने बेटियों को समर्पित रचना पढ़ी-
’’लौंग, तुलसी जावित्री होती है बेटियां!
सीता और सावित्री होती है, बेटियां!
देवियों से बेटियों को कैसे कमतर आँक लूँ!
गंगा, गीता, गायत्री होती है बेटियां!!’’
ओज के कवि डा. चेतन आनन्द ने कहा कि-
’’खामोश हम रहे तो, पहल कौन करेगा!
उजड़े चमन में फेरबदल कौन करेगा!
प्रश्नों के पक्ष में अगर चले गए जो हम,
उत्तर की समस्याओं को हल कौन करेगा!!’’
दिल्ली से पधारीं विख्यात आरजे, मशहूर पत्रकार एवं कवियत्री डा. नीरजा चतुर्वेदी ने पढ़ा कि-
’’अपने ही साये में डर रहा हूँ मै!
ना चाहकर भी सबकुछ कर रहा हूँ मै!
ऐ जिन्दगी तूने ये कैसी शर्त लगा दी!
कि मौत किसी ओर की और मर रहा हूँ मै!!’’ सुनाकर पत्रकारो की पीड़ा व्यक्त की।
इस अवसर पर यतेंद्र कटारिया, कुलसचिव प्रो. पीयूष पाण्डेय, डीन ऐकेडमिक डा. राजेश सिंह, डा. आरएस शर्मा, डा. सुमन कुमारी, डा. स्नेहलता गोस्वामी, डा. अंजलि भारद्वाज, डा. योगेश्वर सिंह, डा. अनिल जयसवाल, डा. आशुतोष, डा. एसएन साहू, डा. धीरज दुबे, डा. ओमप्रकाश गोसाई, डा. अश्विन कुमार सक्सेना, डा. तेजपाल सिंह, डा. राजवर्द्धन, डा. ऐना ऐरिक ब्राउन, अरुण गोस्वामी, मारूफ चौधरी, जनसंपर्क अधिकारी डा. ऋषिराम गुप्ता, सचिन कुमार, सौमिक बनर्जी, मेरठ परिसर निदेशक डा. प्रताप सिंह, मीडिया प्रभारी विश्वास राणा आदि उपस्थित रहे।



