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“जमानत के बदले हरियाली” – अमेठी डीएम संजय चौहान की पहल बनी पर्यावरण संरक्षण की मिसाल

 आवास विकास परिषद बरेली जोन के डिप्टी हाउसिंग कमिश्नर मांगे राम चौहान के वर्ष 2019 में जनपद अमरोहा में लागू किए गए “चौहान मॉडल” से मानी जा रही है इस नवाचार की प्रेरणा

 

नवनीत अग्रवाल 

अमेठी।  जनपद अमेठी में जिलाधिकारी संजय चौहान द्वारा शुरू की गई एक अनूठी और सराहनीय पहल ने न सिर्फ न्यायिक प्रक्रिया को पर्यावरणीय उत्तरदायित्व से जोड़ा है, बल्कि समाज में सुधार की एक नई दिशा भी प्रस्तुत की है। डीएम चौहान की यह पहल अब “जुर्म छोड़ो, पेड़ जोड़ों” जैसे संदेश को जमीन पर उतारते हुए पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बनती जा रही है।

पौधारोपण के बदले जमानत – एक क्रांतिकारी प्रयोग

डीएम संजय चौहान ने आदेश दिया है कि अब अमेठी में सी आर पी सी की धारा 151, 107 व 116 के अंतर्गत शांति भंग के मामलों में आरोपी तभी जमानत पा सकेंगे जब वे पौधारोपण करेंगे और उसकी देखरेख की जिम्मेदारी भी निभाएंगे।

आरोपी को पौधा लगाकर उसकी फोटो और स्थान की जानकारी संबंधित अधिकारियों को देनी होगी। इस प्रक्रिया की निगरानी लेखपाल व कानूनगो के ज़रिए सुनिश्चित की जाएगी।

यह अभिनव कदम न केवल अपराधियों में सुधार की भावना जागृत कर रहा है, बल्कि अमेठी की धरती को हरा-भरा बनाने की दिशा में भी एक सार्थक प्रयास है।

चौहान मॉडल: जहां अपराध से सेवा की ओर बढ़ता है समाज

इस नवाचार की प्रेरणा आवास विकास परिषद बरेली जोन के डिप्टी हाउसिंग कमिश्नर मांगे राम चौहान के वर्ष 2019 में जनपद अमरोहा में लागू किए गए “चौहान मॉडल” से मानी जा रही है। उस समय SDM रहते हुए उन्होंने महसूस किया कि पृथ्वी और व्यक्ति दोनों का तापमान बढ़ रहा है — और इसका समाधान प्रकृति से जुड़ाव में है।

उन्होंने जमानत के लिए “हरित बंध पत्र” की अनिवार्यता लागू की, जिसके तहत अभियुक्तों को पौधारोपण कर उसकी देखभाल का शपथ पत्र भरना पड़ता था। इस प्रयास से 20,000 से अधिक पौधे लगाए गए, और यह मॉडल तत्कालीन मुख्य सचिव से लेकर उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी तक में प्रशंसा पा चुका है।

अमरोहा में लागू इस मॉडल को न सिर्फ परमार्थ निकेतन के स्वामी चिदानंद सरस्वती, स्वामी चक्रपाणि, स्वामी कनक प्रभानंद सरस्वती, स्वामी सत्यदेव, स्वामी यतेंद्र गिरि जैसे कई प्रमुख संतों का समर्थन मिला, बल्कि फिल्म कलाकार जैसे सोनू सूद, अरविंद बघेल, प्रणीत भट्ट, वृषाली हटेलकर, और स्वर्गीय मंगल सिंह ढिल्लन ने भी इसे सराहा और वीडियो संदेशों के माध्यम से समर्थन दिया।

यह मॉडल लंदन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और यूएस बुक रिकॉर्ड्स में भी दर्ज किया गया है, जो इसकी वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है।

डीएम संजय चौहान का स्पष्ट संदेश है –

“यह केवल प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि समाज को हरियाली और सुधार की नई दिशा देने का प्रयास है। प्रकृति के प्रति हर व्यक्ति की भागीदारी अब आवश्यकता नहीं, अनिवार्यता बन गई है।”

जनपद में इस पहल को आम जनता, न्यायिक अधिकारियों और पुलिस प्रशासन का पूरा सहयोग मिल रहा है। कई अभियुक्त पौधारोपण कर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

यह पहल बताती है कि प्रशासनिक शक्ति जब संवेदनशील सोच से जुड़ती है, तो कानून का अनुशासन भी प्रकृति की सेवा बन सकता है।

यह न सिर्फ पर्यावरणीय संरक्षण की दिशा में एक ठोस कदम है,,साथ ही देश के समस्त जिलाधिकारियों के लिए एक प्रेरणा भी।

Khabardar 24

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