आल इंडिया सैन जी महासंघ ट्रस्ट का नीति आयोग में हुआ पंजीकरण, उज्जैन में होगा अधिवेशन

नवनीत अग्रवाल
अमरोहा। आल इंडिया सैन जी महासंघ ट्रस्ट की 161वीं वर्चुअल बैठक ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र कुमार सैन की अध्यक्षता में हुई। जिसका संचालन राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष गिरधारी लाल सैन ने किया। ट्रस्ट के राष्ट्रीय संस्थापक एम एस ठाकुर ने बताया कि हमने अपने ट्रस्ट ऑल इंडिया सैन जी महासंघ ट्रस्ट को नीति आयोग में पंजीकृत करा दिया है। जिसका भविष्य में सभी को लाभ प्राप्त होगा और ट्रस्ट समाज को आत्मनिर्भर बनाने में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। राष्ट्रीय महासचिव मनमोहन सिंह सेन ने कहा कि नीति आयोग, कौशल विकास, सामाजिक विकेंद्रीकरण, सतत विकास, लक्ष्य एवं शैक्षिक कार्य, महिला व बाल विकास के उद्देश्य से एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण हो सकता है। राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष गिरधारी लाल सेन ने कहा कि नीति आयोग देश के प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कार्य करता है। इसलिए देश में जो भी कल्याणकारी योजनाएं बनती हैं उनका मैप नीति आयोग द्वारा ही तैयार किया जाता है। राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र कुमार सेन ने ट्रस्ट के उज्जैन में होने वाले चतुर्थ अधिवेशन को सफल बनाने के लिए सभी को जिम्मेदारियां देनी की बात कही। डा. श्रीओम ने कहा कि किसी भी ट्रस्ट के लिए उसमें पारदर्शिता का होना अति आवश्यक है और हमारा ट्रस्ट उसे पूरी तरह से निभा रहा है। राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष अरुण कुमार ठाकुर ने कहा कि हमने सदस्यों द्वारा आने वाली समस्त राशि को बैंक में ट्रस्ट के खाते में जमा कर उसका पूरा लेखा जोखा तैयार कर रखा है। विधान केसरी समाचार पत्र के मुख्य संपादक विनेश ठाकुर ने नीति आयोग में ट्रस्ट का पंजीकरण होने पर सभी को शुभकानाए दीं । मध्य प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष रामबाबू ने कहा कि महाकाल की धार्मिक नगरी उज्जैन में आने वाले समस्त सैन बंधुओं को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होने दी जाएगी । राष्ट्रीय अध्यक्ष (महिला) सुमन श्रीवास्तव ने सभी से अपनी अपनी पत्नियों को अधिवेशन में लाने की अपील की। इस अवसर पर राजकुमार गवली, विजेंद्र कुमार सेन ,भरत श्रेष्ठ ,चंद्रकांत शिंदे ,चंद्रशेखर जगताप, डा. दिलीप कुमार, किशोर सूर्यवंशी, मनाला किशन ,मांगेराम सेन ,मनोहर खोंडे ,राज बहादुर वर्मा ,सुरेश चंद शर्मा, बाल किशन सेन, ममता कुमारी, सविता खंडागले ,हिमांशु गवली, राजेंद्र श्रीवास ,संध्या पर्वे ,सुंदर सिंह सेन आदि ने भी विचार रखे।




