आल इंडिया सैन जी महासंघ ट्रस्ट की 173 वीं बैठक में सामाजिक अधिवेशन की जरूरत पर चर्चा

नवनीत अग्रवाल
अमरोहा। आल इंडिया सैन जी महासंघ ट्रस्ट की 173 वीं बैठक में सामाजिक अधिवेशन की जरूरत पर चर्चा की गई। रविवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस द्वारा अशोक कुमार शर्मा की अध्यक्षता में हुई बैठक का संचालन राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष गिरधारी लाल सैन ने किया। ट्रस्ट के राष्ट्रीय संस्थापक एम.एस.ठाकुर ने कहा कि कोई भी संगठन चाहे वो राजनीतिक हो या सामाजि। समय समय पर अधिवेशन करते हैं। जम्मू कश्मीर के प्रदेश अध्यक्ष डा.दिलीप कुमार ने कहा कि लोगों में अपने समूह के अंदर समुदाय की भावना जगाने तथा तथा एक दूसरे को समूह में जोड़ने के लिए अधिवेशनों का होना जरूरी है। राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष गिरधारीलाल सैन ने 29 सितंबर को राष्ट्रीय कार्यकारणी पदाधिकारियों से समय से पहुंचने की अपील की ताकि 30 सितंबर को होने वाले कार्यक्रम की रूपरेखा बनाई जा सके। मध्य प्रदेश के प्रदेश प्रवक्ता कुंजबिहारी सविता ने वृक्ष लगाने , ब्लड डोनेशन कैंप लगाने जैसे कार्यक्रम कर जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया। राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र कुमार सैन ने उज्जैन में 30 सितंबर के अधिवेशन की तैयारी के बारे में बताया। ट्रस्ट के राष्ट्रीय महासचिव एडवोकेट मनमोहन सिंह सैन ने कहा कि अधिवेशन के द्वारा सामाजिक संगठन के विकास को बल मिलता है। अधिवेशन में लोगों की उपस्थिति संगठन की एकजुटता का प्रमाण होती है तथा संगठन की छवि मजबूत होती है। मध्यप्रदेश में युवा इकाई के प्रदेश अध्यक्ष कमलेश सैन ने कहा कि सामाजिक संगठन का काम लोगों को जोड़ना और उनके कल्याण के लिए सेवा करना है। जिसके लिए अधिवेशन एक ऐसा माध्यम है जिसमें सभी दशा पर विचार विमर्श कर आगे प्रगति की ओर बढ़ने की नीति बनाई जाती है। बिहार के प्रदेश अध्यक्ष डा.रंजन कुमार ने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से संगठन तथा समाज को नई ऊर्जा मिलती है। चिकित्सा प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. श्री ओम ने कहा कि उज्जैन में होने वाला सैन समाज का अधिवेशन अपने आप में ऐतिहासिक होगा। महाराष्ट्र के प्रदेश अध्यक्ष मनोहर खोंडे ने कहा कि इस अधिवेवन के माध्यम से एकदूसरे की संस्कृति को जानने का अवसर भी मिलेगा।सी. पी.सिंह,दीपक ठाकुर, मा. जयप्रकाश सिंह,राजकुमार गवली,राजेश कुमार शर्मा, राकेश रंजन,सविता खड़ांगले,सुधीर कुमार,सुंदर सिंह सैन,विजय कुमार,मांगेराम सैन, कृष्णा सैन, महेश वर्मा आदि ने विचार व्यक्त किए।





