अर्धकुंभ से कमतर नहीं है तिगरी में लगने वाला ऐतिहासिक गंगा मेलाः विपिन सागर
त्रेतायुग में श्रवण कुमार अपने नेत्रहीन माता-पिता को तीर्थ यात्रा कराते समय रुके थे यहां

विधानसभा धनोरा के गजरौला ब्लॉक में लगने वाले ऐतिहासिक तिगरी मेले का इतिहास त्रेतायुग और महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह मेला त्रेतायुग में श्रवण कुमार के अपने नेत्रहीन माता-पिता को तीर्थ यात्रा कराते समय यहां रुकने के कारण शुरू हुआ था। महाभारत काल में, पांडवों ने भी मृत सैनिकों की आत्मा की शांति के लिए इसी स्थान पर दीपदान किया था, जिसके बाद से कार्तिक पूर्णिमा से एक दिन पहले दीपदान की परंपरा चली आ रही है।
यह मेला कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर लगता है और लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए आते हैं। श्रद्धालु गंगा आरती में भाग लेते हैं और दीपदान करते हैं।
यह मेला धार्मिक महत्व के साथ-साथ सांस्कृतिक और सामाजिक एकता का भी संगम है। इसमें व्यापारियों के स्टॉल, झूले और लोक कला का प्रदर्शन होता है।
औद्योगिक क्षेत्र गजरौला के अंतर्गत आने वाले तिगरी गंगा धाम में लगने वाले ऐतिहासिक मेले में प्रदेश के अन्य जिलों से श्रद्धालु पहुंच चुके हैं और लगातार आ रहे हैं ग्रामीण क्षेत्र के लोग और किसान अपने अपने खेतों में गेहूं की फसल की बुवाई करने के बाद अब अपने ट्रैक्टर ट्रॉली पर सवार होकर मेले का आनंद लेने के लिए मेला स्थल पर पहुंच रहे हैं जहां पर उन्होंने अस्थाई तंबू लगाकर मेले का आनंद ले रहे हैं मेले पर हर प्रकार की दुकान धीरे-धीरे सज चुकी हैं बूढ़े जवान और बच्चों की भीड़ भी मेला स्थल पर इकट्ठी होने लगी है इतना ही नहीं बूढ़े तो वहां बैठकर हुक्का गुड़गुडा रहे हैं
मेले में आन वाले सभी श्रद्धालओं से निवेदन है कि श्रद्धाल स्नान करने के लिए गहरे पानी में ना जाएं क्योंकि गहरे पानी में खतरा हे ।अपने आप का ख्याल रखें। आने वाले सभी श्रद्धालओं से अपील है कि मेले में गंदगी ना करें। इसको स्वच्छ बनाए रखें ।
मेले में आने वाले सभी श्रद्धालूआं का एक बार पुनः स्वागत है।
विपिन सागर, भाजपा नेता अमरोहा



