ना समझोगे तो मिट जाओगे ऐ हिंदोस्तां वालो । तुम्हारी दास्तां तक भी ना होगी दास्तानों में ।।

मुजाहिद चौधरी एडवोकेट स्तंभ लेखक, विश्लेषक हसनपुर,अमरोहा की कलम से…..
17 अक्टूबर सर सैयद डे पर विशेष…
ए एम यू अलीगढ़ उस देश भक्त, दार्शनिक, समाज सेवक, लेखक और महान व्यक्तित्व की सोच, आदर्शों, संघर्षों और संकल्पों का परिणाम है । जिसे लोग सर सैयद के नाम से जानते हैं ।… अलीगेरियन की भाषा शैली,बात करने का अंदाज़, रहने का तरीका उसकी परफॉर्मेंस उसको विशिष्टता प्रदान करती है-मुजाहिद चौधरीहर साल की तरह इस साल भी 17 अक्टूबर यानी अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के संस्थापक सर सैयद अहमद खां का जन्म दिवस देश और दुनिया के हजारों शहरों में उसी श्रद्धा परंपरा, सम्मान और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। जिस भावना और सम्मान के साथ यह दिवस अलीगढ़ विश्वविद्यालय में मनाया जाता रहा है। और इस दिन की कद्रो कीमत, इस दिन की इज्जत और एहतराम, इस दिन की उपयोगिता और महत्व केवल ए.एम.यू. का पूर्व छात्र, पूर्व शिक्षक, पूर्व कर्मचारी अथवा पूर्व अधिकारी ही समझ सकता है । बरसों से विभिन्न विवादों और विरोधों का सामना करता चला आ रहा देश का यह संस्थान एम ए ओ कॉलेज की स्थापना से लेकर आज तक देश और दुनिया के सभी जातियों,धर्मों, पंथों, भाषाओं और क्षेत्रों के निवासियों को बिना किसी भेदभाव के निष्पक्ष रूप से शिक्षा प्रदान कर रहा है । और यह कड़वा सच है कि ए एम यू अलीगढ़ ही वह संस्थान है, जिसने देश और दुनिया को शिक्षा और संस्कारों के माध्यम से शैक्षिक, आर्थिक, व्यापारिक, सामाजिक और राजनीतिक क्रांति लाने में अहम रोल अदा किया है । चाहे हमारे देश की विधायिका, न्याय पालिका , कार्यपालिका अथवा कोई भी संस्थान या संगठन हो, ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है,जहां अलीगढ़ विश्वविद्यालय द्वारा शिक्षित कोई छात्र अपनी सेवाएं न दे रहा हो । हर क्षेत्र में एक एम यू अलीगढ़ ने प्रतिनिधित्व दिया है और समर्पण,सेवा और सहयोग के उच्चतर मापदंड स्थापित किए हैं । और यह परिणाम किसी एक संस्थान मात्र का नहीं, किसी एक सरकार मात्र का नहीं, बल्कि यह सब उस महान देश भक्त, दार्शनिक,महान समाज सेवक,महान लेखक और महान व्यक्तित्व की सोच, आदर्शों, संघर्षों और संकल्पों का परिणाम है । जिसे लोग सर सैयद के नाम से जानते हैं । यह वह कारवां है जिसे सर सैयद अकेले लेकर निकले थे, और जिसको उन्होंने एक अजी़म कारवां में तब्दील किया । बकौल शायर मैं अकेला ही चला था जानिबे मंज़िल मगर । लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया ।। उसी कारवां से आज पूरा देश और दुनिया लाभान्वित हो रही है । शिक्षित,विकसित, समृद्ध और सुरक्षित हो रही है । ए एम यू अलीगढ़ केवल अपनी उच्च कोटी की शिक्षा प्रदान करने के लिए ही नहीं जानी जाती, बल्कि वहां इस तरह के संस्कार और प्रशिक्षण दिया जाता है कि अलीगढ़ का पढ़ा हुआ छात्र लाखों की भीड़ में अलग ही नजर आता है । उसका काम अलग ही दिखाई देता है । उसकी सेवा अलग नजर आती है । उसकी भाषा शैली,बात करने का अंदाज़,रहने का तरीका उसकी परफॉर्मेंस उसको विशिष्टता प्रदान करती है । और इसी विशिष्टता को अलीगेरियन कहा जाता है । लेकिन देखने में आ रहा है कि पिछले कुछ वर्षों से अलीगढ़ की पुरातन परंपरा, अलीगढ़ की रिवायात,तहज़ीबो-तमद्दुन में कुछ कमी आई है और ये ही नहीं विदेश से शिक्षा ग्रहण करने हेतु आने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या में भी अपेक्षाकृत वृद्धि होने की बजाय कमी आई है । जो निश्चित रूप से संस्थान के शैक्षिक और सुरक्षात्मक माहौल पर प्रश्न चिन्ह लगाती है । ए.एम.यू.प्रशासन तथा केंद्र सरकार को इस संदर्भ में विस्तृत जांच कर, समन्वय व सहयोग स्थापित करते हुए संयुक्त रूप से ए.एम.यू.अलीगढ़ में अत्याधुनिक उच्च एवं उच्चतर शिक्षा प्रदान करने हेतु वांछित आर्थिक सहायता और संसाधन, अनुकूल वातावरण तथा सुरक्षित व्यवस्था उपलब्ध कराने की जरूरत है । नए – नए कोर्सेज तथा छात्र- छात्राओं को रहने हेतु होस्टिलों में सुविधाएं बढ़ाने और खेलों में विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है । समाज के समृद्ध व्यक्तियों तथा औद्योगिक घरानों द्वारा अपने-अपने क्षेत्रों में सर सैयद अहमद खां की तरह शैक्षिक और तकनीकी संस्थान खोलकर देश के नागरिकों की शिक्षा की जरूरतों को पूरा करने हेतु गंभीर प्रयास करने की आवश्यकता है। यही सर सैयद को सच्ची श्रद्धांजलि होगी । ना समझोगे तो मिट जाओगे ऐ हिंदोस्तां वालो । तुम्हारी दास्तां तक भी ना होगी दास्तानों में ।।
मुजाहिद चौधरी एडवोकेट स्तंभ लेखक, विश्लेषक हसनपुर,अमरोहा की कलम से…..




