अमरोहाअमेठीअम्बेडकर नगरअलीगढ़आगराआजमगढ़इटावाउत्तरप्रदेशउन्नावएटाऔरैयाकन्नौजकानपुरकानपुर देहातकासगंजकुशीनगरकौशाम्बीखीरीगाजियाबादगाज़ीपुरगोंडागोरखपुरगौतम बुद्ध नगरचंदौलीचित्रकूटजालौनजौनपुरझाँसीदेवरियापीलीभीतप्रतापगढ़प्रयागराजफतेहपुरफर्रुखाबादफिरोजाबादफैजाबादबदायूंबरेलीबलरामपुरबलियाबस्तीबहराइचबागपतबांदाबाराबंकीबिजनौरबुलंदशहरमऊमथुरामहाराजगंजमहोबामिर्जापुरमुजफ्फरनगरमुरादाबादमेरठमैनपुरीरामपुररायबरेलीलखनऊललितपुरवाराणसीशामलीशाहजहाँपुरश्रावस्तीसंत कबीर नगरसंत रविदास नगरसम्भल (भीम नगर)सहारनपुरसिद्धार्थ नगरसीतापुरसुल्तानपुरसोनभद्रहमीरपुरहरदोईहाथरस (महामाया नगर)हापुड़

गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले अल्पसंख्यकों के उत्थान को क्या कर रही है सरकार?

अमरोहा के बसपा सांसद कुंवर दानिश अली ने लोकसभा के शीतकालीन सत्र में पूछा सवाल, जवाब पर जताई निराशा

नवनीत अग्रवाल

अमरोहा। अमरोहा लोकसभा क्षेत्र के बसपा सांसद कुंवर दानिश अली ने शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा में केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री स्मृति जूबिन ईरानी से तारांकित प्रश्न के माध्यम से ग़रीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले अल्पसंख्यकों एवं उनके उत्थान के संबंध में प्रश्न पूछा। जवाब मिलने पर उन्होंने कहा है कि ये दुर्भाग्य की बात है कि सरकार ने अल्पसंख्यकों की ग़रीबी का अलग से अभी तक मूल्यांकन नहीं कराया है और आगे भी मूल्यांकन का कोइ विचार नहीं रखती है। बिना मूल्यांकन के योजनाओं का सही तरह से लागू होना मुमकिन ही नहीं है। इस से साफ़ पता चलता है कि सरकार अल्पसंख्यकों के उत्थान के लिए सिर्फ़ कागज़ी कारवाही कर रही है सरकार की कथनी और करनी में ज़मीन-आसमान का अंतर है।

बृहस्पतिवार की शाम को जानकारी देते हुए सांसद कुंवर दानिश अली ने बताया कि उन्होंने

आज लोकसभा में प्रश्न में पूछा था कि क्या सरकार का प्रत्येक राज्य में ग़रीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले मुसलमानों सहित अल्पसंख्यकों की पहचान करने के लिए कोई सर्वेक्षण कराने का विचार है? अल्पसंख्यकों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के लिए बनाई गई योजनाओं का ब्यौरा क्या है? इन योजनाओं के समुचित क्रियान्वयन और निगरानी के लिए क्या तंत्र मौजूद है? जिसके उत्तर में अल्पसंख्यक कार्य मंत्री स्मृति ज़ूबिन इरानी ने अपने उत्तर में कहा कि सरकार द्वारा अल्पसंख्यकों की ग़रीबी का अलग से मूल्यांकन नहीं किया गया है। सरकार ने अल्पसंख्यकों विशेषकर आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों सहित समाज के हर वर्ग के कल्याण और उत्थान के लिए विभिन्न योजनाओं को लागू किया है। सांसद कुंवर दानिश अली का कहना है कि बिना मूल्यांकन के सरकारी योजनाओं का सही तरह से लागू होना मुमकिन ही नहीं है। इस से साफ़ पता चलता है कि सरकार अल्पसंख्यकों के उत्थान के लिए सिर्फ़ कागज़ी कारवाही कर रही है सरकार की कथनी और करनी में ज़मीन-आसमान का अंतर है।

Khabardar 24

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!