आल इंडिया सैन जी महासंघ ट्रस्ट की बैठक में पिछड़े समाज में एकजुटता के अभाव पर हुई चर्चा

नवनीत अग्रवाल
अमरोहा। रविवार को जूम एप पर हुई बैठक में ट्रस्ट के राष्ट्रीय संस्थापक एम एस ठाकुर ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद15(4) चार के अंतर्गत राज्य को सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से पिछड़े वर्गों के लिए प्रावधान बनाने की शक्ति प्राप्त है। अनुच्छेद 16 (4 )के अंतर्गत राज्य को इन वर्गों के लिए सरकारी नौकरियों में स्थान आरक्षित करने की शक्ति प्राप्त है परंतु संविधान में पिछड़े वर्ग की कोई परिभाषा नहीं दी गई है।
जाने माने पत्रकार एवं विधान केसरी के मुख्य संपादक विनेश ठाकुर ने कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग एक सामूहिक शब्द है। जिसका उपयोग भारत सरकार द्वारा शैक्षिक या सामाजिक रूप से पिछड़ी जातियों को वर्गीकृत करने के लिए कहा जाता है। यह सामान्य जातियों अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के साथ भारत की जनसंख्या के कई अधिकारी वर्गीकरण में से एक है। भारत में 1980 की मंडल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार 52 प्रतिशत आबादी को ओबीसी माना गया लेकिन वोट बैंक के कारण सभी राजनीतिक पार्टियां सामाजिक रूप से मजबूत जातियों को पिछड़े वर्ग में शामिल कर आरक्षण देने का काम करती रही है । जिस कारण सामाजिक एवं आर्थिक रूप से पिछड़ी हुई जातियों को न्याय नहीं मिल पाता है। अब समय आ गया है अन्य पिछड़ा वर्ग एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करें।
अमरोहा जनपद में गजरौला निवासी राष्ट्रीय महासचिव मनमोहन सिंह सेन ने कहा कि हम सबको इस बात पर विचार करते हुए कि सैन समाज को भी राजनीति में भागीदारी मिले और सेन समाज के व्यक्ति भी विधायक तथा सांसद चुने जाएं। इसके लिए हमें जाति से जमात की ओर जाते हुए समान सामाजिक स्थिति तथा समान विचारधारा के लोगों को साथ लेते हुए एक राजनीतिक पार्टी बनाकर नीति में राजनीति में बढ़-चढ़कर भाग लेते हुए जनता के बीच जाकर चुनाव लड़ने होंगे तभी सेन समाज तथा अन्य अति पिछड़े समाजों को राजनीति में स्थान मिल पाएगा। राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष गिरधारी लाल सेन ने कहा की आजादी के बाद भारतवर्ष में जो सरकारें बनीं। उन्होंने लगभग 35 वर्ष बाद पिछड़ों के मामलों की देखभाल करने के लिए एक अलग जन कल्याण मंत्रालय की स्थापना की । साथ ही 1998 में इसका नाम बदलकर सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय भी कर दिया लेकिन भारतवर्ष में पिछड़ों की स्थिति में कोई सुधार दिखाई नहीं दिया। पिछड़ों के लिए 2 संस्थानों राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग तथा राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त और विकास निगम होने के बाद भी अति पिछड़ा वर्ग के उत्थान के लिए कोई ठोस योजना सरकारें नहीं बना पाई। डा.श्रीओम ने कहा कि पिछड़ों के पिछड़ेपन का कारण अंधविश्वास तथा लकीर के फकीर रहने का है। यदि हम विज्ञान के समय में भी लकीर के फकीर बने रहेंगे तब हमारी स्थिति और भी बस से बदतर होती जाएगी । बिहार के प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर रंजन कुमार ने कहा अब समय आ गया है , हमें अपने समाज को जो जिम्मेदार व्यक्ति हैं। अलग-अलग क्षेत्र में अपनी कार्यकुशलता का परिचय देते हुए आने वाली पीढ़ी को कैडर कैंपों द्वारा राजनीतिक ट्रेनिंग देकर पूरी कुशलता के साथ राजनीति में उतारने का कार्य करें। बिजेंद्र कुमार सैन ने कहा कि समाज उत्थान के लिए पहले स्वयं तथा परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत करे समाज खुद मजबूत हो जाएगा। ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र कुमार सेन ने कहा कि देश में निरंतर सेन समाज के ऊपर दबंगों द्वारा हमले तथा हत्याएं की जा रही हैंं। जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा तथा सरकार से सैन समाज को सुरक्षा देने की मांग की। अन्यथा सभी सैन संगठन एकजुट होकर आंदोलनात्मक रुख अपनाने के लिए मजबूर होंगे। मध्य प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष रामबाबू श्रीवास ने 30सितंबर 2023 को उज्जैन में होने अधिवेशन में आने वाले प्रतिभागियों से समय से सूचित करने की अपील की। जिससे किसी को भी असुविधा का सामना ना जब करना पड़े। बैठक में मांगेराम सैन ,कृष्णकांत, राजकुमार गवली, अंडमान एण्ड निकोबार दीप समूह के प्रदेश अध्यक्ष अशोक कुमार शर्मा ,उत्तर प्रदेश के प्रदेश उपाध्यक्ष मास्टर जयप्रकाश सिंह ,सुधीर कुमार ,जम्मू काश्मीर के प्रदेश अध्यक्ष डॉ दिलीप कुमार ,श्रीमती रूपाली ,बुलगारिया से सुरेश चंद शर्मा ,दीपक कुमार ,योगेश कुमार ,विपिन कुमार सैन ,तेलंगाना के प्रदेश अध्यक्ष किशन मनाला ,आदि ने भी विचार रखे। संचालन राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष गिरधारी लाल सैन ने किया।





