टीबी रोग के खात्मे को रामबाण साबित हो रहा जुबिलेंट का आईवीआरएस पोर्टल, चीफ सेक्रेटरी भी प्रभावित

नवनीत अग्रवाल
अमरोहा। टीबी रोग को जड़ से खत्म करने की दिशा में जुबिलेंट इंग्रेविया लिमिटेड एवं जुबिलेंट भरतिया फाउंडेशन द्वारा शुरू किए गए आईवीआरएस पोर्टल की प्रदेश के मुख्य सचिव दुर्गाशंकर मिश्र ने भी सराहना की है। साथ ही कहा कि इसे प्रदेश के सभी 75 जनपदों में शुरू करने पर भी विचार चल रहा है ताकि टीबी रोग पर अंकुश लगाया जा सके।
बुधवार को अमरोहा जनपद के गजरौला में स्थित जुबिलेंट इंग्रेविया लिमिटेड में निदेशक जनसंपर्क सुनील दीक्षित ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मंगलवार को अमरोहा में कलेक्ट्रेट स्थित सभागार में मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र ने वीडियो कांंफ्रेसिंग के जरिए समीक्षा बैठक ली थी। बैठक में डीएम बीके त्रिपाठी ने टीबी रोग को खत्म करने के लिए जुबिलेंट द्वारा तैयार किए गए आईवीआरएस पोर्टल के बारे में जानकारी दी। इस पोर्टल के संबंध में जानकारी होने पर चीफ सेक्रेटरी काफी प्रभावित हुए। साथ ही कहा कि टीबी रोग को खत्म करने में जुबिलेंट का यह पोर्टल काफी सार्थक साबित होगा। इसे प्रदेश के सभी 75 जनपदों में लागू किया जा सकता है। वहीं जुबिलेंट भरतिया फाउंडेशन में मेडिकल हेड डा.सुजिंदर फोगाट ने बताया कि इस पोर्टल के आने के बाद से टीबी रोगियों को काफी फायदा पहुंच रहा है। अब वे समय पर दवाएं ले रहे हैं। साथ ही अपनी किसी भी जिज्ञासा के संबंध में चिकित्सकों से भी सीधी बात कर पा रहे हैं। जुबिलेंट इंग्रेविया लिमिटेड के यूनिट हेड हितेंद्र अवस्थी का कहना है कि कंपनी अपनी सीएसआर विंग से सामाजिक कार्य करती रहती है। आईवीआरएस पोर्टल भी उसी की एक कड़ी है।
आपको बता दें कि टीबी रोग के खात्मे के लिए सबसे जरूरी है कि रोगी नियमित दवा का सेवन करे। यदि एक भी दिन दवा नहीं खाई तो इसका दुष्परिणाम सामने आ सकता है। ऐसे में जुबिलेंट भरतिया फाउंडेशन का आईवीआरएस पोर्टल टीबी रोगियों के लिए रामबाण साबित हो रहा है। होता यह है कि टीबी रोगी की पास इस पोर्टल से प्रत्येक आधे घंटे के बाद एक कॉल आती है। इसमें उधर से पूछा जाता है कि आपने दवा खाली है? यदि हां तो एक दबाएं और नहीं तो दो दबाएं। दवा खत्म हो गई है तो तीन दबाएं और चिकित्सक से कोई जानकारी करनी है तो पांच दबाएं। जब तक रोगी कॉल का जवाब नहीं देता है तब तक थोड़ी खोड़ी देर बात कॉल आती रहती है। इससे रोगी दवा खाने से चूक नहीं पाता है और नियमित दवा खाने से रोग भी धीरे-धीरे खत्म होने लगता है।





